भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं। GIFT Nifty शुरुआती कारोबार में करीब 110 अंकों की गिरावट के साथ 23,677 के आसपास ट्रेड करता दिखा, जिससे साफ है कि घरेलू बाजार में दबाव बना रह सकता है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
सोमवार को भी बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। सेंसेक्स 1,300 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 23,850 के नीचे फिसल गया। लगभग सभी सेक्टरों में कमजोरी रही। बाजार भावना पर उस वक्त और असर पड़ा जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए ईंधन बचाने और सोने की खरीद में संयम बरतने की अपील की।
ग्लोबल बाजारों से मिले-जुले संकेत
वैश्विक बाजारों का रुख मंगलवार सुबह मिला-जुला रहा। अमेरिकी बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुए, लेकिन एशियाई बाजारों में दबाव दिखाई दिया। निवेशक लगातार बढ़ते तेल के दाम और मध्य पूर्व में तनाव के असर का आकलन कर रहे हैं।
MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स में 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं S&P 500 फ्यूचर्स भी एशियाई कारोबार में 0.3 प्रतिशत नीचे रहे। जापान का Topix 0.3 प्रतिशत मजबूत हुआ, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट हल्की कमजोरी के साथ बंद हुआ।
अमेरिका में S&P 500 और Nasdaq रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुए। हालांकि, एशियाई बाजारों पर तेल की तेजी और भू-राजनीतिक तनाव का असर साफ नजर आया।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता
बाजार में चिंता का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के सीजफायर जवाब को “मूर्खतापूर्ण” बताया और कहा कि युद्धविराम “लाइफ सपोर्ट” पर है। इससे निवेशकों को डर है कि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रह सकता है।
विशेष रूप से Strait of Hormuz को लेकर चिंता बनी हुई है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट्स में से एक माना जाता है। अगर यहां बाधा आती है तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
$105 के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत $105 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है, जबकि अमेरिकी क्रूड भी $98 के पार चला गया। लगातार बढ़ती तेल कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
महंगा कच्चा तेल महंगाई बढ़ा सकता है, रुपये पर दबाव डाल सकता है और कंपनियों की कमाई पर असर डाल सकता है। सोमवार को रुपया भी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 95.31 पर बंद हुआ।
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने सोमवार को भारतीय बाजार से 8,438 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जो 24 अप्रैल के बाद सबसे बड़ी एकदिवसीय बिकवाली रही। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 5,940 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक अनिश्चितता बनी रहेगी, भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
तकनीकी स्तरों पर नजर
Enrich Money के CEO Ponmudi R के मुताबिक निफ्टी फिलहाल 23,800-23,900 के दायरे में ट्रेड कर रहा है। यदि निफ्टी 23,800 के नीचे टिकता है तो गिरावट बढ़कर 23,600-23,500 तक जा सकती है। वहीं ऊपर की तरफ 24,000 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
बढ़ती तेल कीमतें, कमजोर रुपया और विदेशी निवेशकों की बिकवाली फिलहाल भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में निवेशकों को आने वाले दिनों में सतर्क रहने की जरूरत है। बाजार की दिशा अब काफी हद तक ग्लोबल घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी।
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